ओपेक संगठन की कतर द्वारा हालिया समय में सदस्यता छोड़ देने से इस संगठन के अन्तर्राष्ट्रीय महत्व पर कोई असर पड़ेगा | इसके उद्देश्य को भी समझाए | क्या ओपेक इंटरनेशनल सेमिनार अन्तर्राष्ट्रीय परिदृश्य को प्रभावित करने के लिए आयल डिप्लोमेसी का प्रयोग कर सकती है | तर्क सहित उत्तर दीजिए |


स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कल टोक्यो में जापान के प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार डॉ. हिरोतो इजुमी के साथ स्वास्थ्य सेवा पर दूसरे सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के तहत पहली संयुक्त समिति (जेसीएम) की बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस एमओसी पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान अक्‍टूबर 2018 में स्‍वास्‍थ्‍य एवं कल्‍याण में सहयोग के लिए भारत के आयुष्‍मान भारत और जापान के एशिया हेल्‍थ एंड वेल-बीइंग इनिशिएटिव (एएचडब्ल्यूआईएन) ने हस्‍ताक्षर किए थे।

संयुक्त समिति ने एमओसी के तहत चल रही गतिविधियों की स्थिति की समीक्षा की और इन गतिविधियों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। ये गतिविधियां दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक लाभ को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।

बैठक के दौरान जापान ने स्वास्थ्य की देखभाल के क्षेत्र में दोनों देशों की सार्वजनिक/ निजी एजेंसियों के बीच विशिष्ट परियोजनाओं को प्रस्तुत किया। ये परियोजनाएं स्‍वास्‍थ्‍य सेवा लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा दक्षता एवं चिकित्सा देखभाल की दक्षता में सुधार के लिए तृतीयक अस्पताल में आईसीटी की उपयोगिता, आपातकालीन चिकित्सा के क्षेत्र में मानव संसाधनों का आदान-प्रदान और भारत एवं जापान के बीच स्वास्थ्य सेवा नवाचार नेटवर्क की स्थापना जैसे क्षेत्रों से संबंधित है। भारत ने इन परियोजनाओं का स्वागत किया और इनसे मिली सीख के आधार पर इन गतिविधियों में विस्तार की इच्‍छा जताई ।

साथ ही भारत ने जापान के विचार के लिए विभिन्न सहयोग परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत किए जो निम्‍नलिखित हैं:

भारत और जापान के बीच मानव संसाधन विकास में साझेदारी और तृतीयक देखभाल केंद्रों के बीच सहयोग, जेआईसीए के माध्यम से अस्पताल के बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहयोग, पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग, आयुर्वेद एवं आयुर्वेदिक फार्माकोपिया को विशेष रूप से पहचानने, मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में विनिर्माण इकाइयों की स्थापना पर ध्यान केंद्रित करते हुए उच्च मानक की जेनेरिक दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों के विकास में सहयोग, कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में दोनों देशों के संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान सहयोग और जेनेरिक चिकित्सा के क्षेत्र में कौशल विकास के लिए सहयोग।

बैठक के अंत में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने आतिथ्य-सत्‍कार के लिए जापान के प्रतिनिधिमंडल को धन्यवाद दिया और निर्धारित समय पर भारत में अगली जेसीएम बैठक के लिए जापान का स्वागत किया।

******


भारतीय नौसेना अकादमी (आईएनए) में आज शुक्रवार 18 अक्टूबर, 2019 को “राष्ट्रों को आकार देने में समुद्री शक्ति की भूमिका” पर दिल्ली श्रृंखला समुद्री शक्ति के छठे संस्करण का समापन हुआ। सेमिनार के दौरान इस विषय पर केंद्रित आठ व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) और पश्चिमी नौसेना कमान के पूर्व फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन-चीफ, वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा द्वारा एक आमंत्रण वार्ता भी इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। कार्यक्रम में कई सेवारत और सेवानिवृत्त वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, प्रख्यात शिक्षाविद, थिंक टैंक के प्रतिनिधि, रक्षा विश्लेषक और प्रतिष्ठित दिग्गज उपस्थित थे।

वीएसएम (सेवानिवृत्त), कमोडोर सी उदय भास्कर की अध्यक्षता में संगोष्ठी में दूसरे दिन के दौरान ‘वैश्विक राजनीति में समुद्र शक्ति की केंद्रीयता’ विषय पर विचार-विमर्शों का आयोजन किया गया। आईएनएएस के मिडशिपमैन आदित्य जैन, अमोघ चावला और टीएम रवि किरण ने ‘आईओआर में भारत की समुद्री रणनीति के साथ भू राजनीति को संबंध’ विषय पर एक व्याख्यान प्रस्तुत किया। तक्षशिला संस्थान के सह-संस्थापक और निदेशक, श्री नितिन पाई ने ‘समुद्री शक्ति का जन्म हुआ अथवा सृजन किया गया’ विषय पर अपनी प्रस्तुति दी और शिव नादर विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय संबंध और शासन अध्ययन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ. जबीन टी जैकब ने ‘चीन की वैश्विक महत्वाकांक्षा: समुद्री क्षेत्र विस्तार की समझ’ पर अपना व्याख्यान दिया। नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन की रिसर्च एसोसिएट सुश्री रितिका कपूर ने ‘हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीति का विकास: श्रीलंका में चीन की समुद्री शक्ति का विस्तार’ विषय पर एक व्याख्यान प्रस्तुत किया।

भारतीय नौसेना के डिप्टी कमांडेंट और चीफ इंस्ट्रक्टर, रियर एडमिरल तरुण सोबती ने समापन संबोधन देते हुए उच्च गुणवत्तायुक्त विचार-विमर्श के माध्यम से अपने समृद्ध अनुभव और बौद्धिक प्रस्तुति के लिए अध्यक्ष और प्रतिनिधियों की भागीदारी की सराहना की। दिल्ली श्रृंखला समुद्री शक्ति 2019 के समन्वयक कमोडोर बेन एच बर्सन ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

इंडियन नेवल एकेडमी ने एझीमाला स्थित माउंट दिल्ली के बाद वार्षिक सेमिनार को ‘दिली’ श्रृंखला के रूप में नामित किया, जो इस क्षेत्र के समुद्री इतिहास के विकास का गवाह रही है। संगोष्ठी के दौरान समृद्ध अनुभवों के साथ और ‘दिल्ली’ श्रृंखला समुद्री क्षेत्र के विकास के संदर्भ में युवा अधिकारियों और कैडेटों के लिए प्रोत्साहन का भी आधार रही है।

*******


उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने चुनावों की पूर्व-संध्या पर मतदाताओं को लुभाने के लिए लोक-लुभावन उपायों के विरूद्ध आज राजनीतिक दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि इससे विकास पर होने वाले खर्च पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में आज बैंगलुरू के कानून के छात्रों से बातचीत करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा लोकतंत्र को मजबूत करना जनता के हाथ में है। उन्होंने कहा मतदान करना केवल एक अधिकार ही नहीं है, बल्कि उनका उत्तरदायित्व भी है। उन्होंने लोगों से मांग करते हुए कहा कि वे अपने प्रतिनिधियों को चुनते समय 4 सी – करेक्टर (चरित्र), कंडक्ट (व्यवहार), कैलिबर (बुद्धि) और कैपेसिटी (क्षमता) को ध्यान में रखें।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से कुछ लोग अन्य 4 सी – कास्ट (जाति), कम्युनिटी (समुदाय), कैश (धन) और क्रिमिनलिटी (अपराध) को बढ़ावा देकर लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों का चयन करते समय लोगों को सोच-विचार कर निर्णय लेना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने राज्य विधानसभाओं और लोकसभा के लिए एक साथ चुनाव कराने पर जोर देते हुए कहा कि इससे एक समय में ही पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की मजबूती के लिए राज्यों में किसी कारण से स्थानीय निकायों के चुनावों को स्थगित करने की संभावना नहीं होनी चाहिए।

श्री नायडू ने कहा कि न्याय तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने में अधिवक्ता महत्वपूर्ण हितधारक हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे स्थिर और समृद्ध समाज की नींव तैयार होती है।

विभिन्न न्यायालयों में अत्यधिक संख्या में लंबित मुकदमें के बारे में उपराष्ट्रपति ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में लगभग 60,000 मुकदमें लंबित हैं और उच्च न्यायालयों में लगभग 44 लाख मुकदमें हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अकसर ऐसा कहा जाता है कि न्याय में देरी होना, न्याय से वंचित होना है।

***


केन्द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज नई दिल्‍ली में विश्‍व खाद्य दिवस 2019 मनाये जाने के लिए आयोजित समारोह में कहा, ‘आम लोगों तक पहुंच सुनिश्चित कर सकने वाले दिग्‍गजों एवं महत्‍वपूर्ण निकायों को प्रेरित कर हम प्रत्‍येक व्‍यक्ति तक पहुंच सकते हैं। हमें समाज के हर तबके को शामिल करना है, ताकि ‘ईट राइट इंडिया’ एक राष्‍ट्रव्‍यापी अभियान बन सके।’ इस दिवस की थीम है ‘शून्‍य भूखमरी वाली दुनिया के लिए स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक भोजन।’ इस अवसर पर डॉ. हर्षवर्धन ने ‘ईट राइट जैकेट’ और ‘ईट राइट झोला’ के साथ-साथ ‘खाद्य सुरक्षा मित्र (एफएसएम)’ योजना का भी शुभारंभ किया, ताकि खाद्य सुरक्षा व्‍यवस्‍था को मजबूत किया जा सके और इसके साथ ही ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान को व्‍यापक बनाया जा सके।
डॉ. हर्षवर्धन ने विशेष बल देते हुए कहा कि लोगों में बहुप्रती‍क्षित सामाजिक एवं स्‍वभाव संबंधी बदलाव लाने के लिए ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान अंतिम जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि यदि सही रणनीति अपनायी जाए और समाज के हर तबके तक पहुंचने के लिए ठोस प्रयास किये जाएं, तो ‘फिट इंडिया’ अभियान के साथ-साथ इस अभियान को भी उल्‍लेखनीय सफलता मिल सकती है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि लोगों को महात्‍मा गांधी के संदेशों को अपनाना चाहिए जिनमें उन्‍होंने कम भोजन करने, सुरक्षित एवं स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक भोजन करने, अतिरिक्‍त भोजन को साझा करने की आदत डालने और खाद्य पदार्थों की बर्बादी में कमी लाने को कहा है। डॉ. हर्षवर्धन ने बहुक्षेत्रीय अवधारणा पर प्रकाश डालने के लिए पोलियो के उदाहरण को उद्धृत करते हुए कहा, ‘हम सभी को अपने-अपने हिसाब से यह जिम्‍मेदारी लेनी चाहिए। मेरा मानना है कि हम सभी आपस में मिलकर स्‍वास्‍थ्‍य एवं समाज की चुनौतियों का सामना करने के लिए नई अवधारणाएं विकसित करने में समर्थ साबित होंगे।’
खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ‘जन आंदोलन’ की विशिष्‍ट अहमियत पर प्रकाश डालते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकने के प्रयोजन को मजबूत करने के लिए लोगों अथवा संगठनों की ओर से छोटे-छोटे सकारात्‍मक कदम उठाये जा सकते हैं।
‘खाद्य सुरक्षा मित्र’ योजना छोटे एवं मझोले खाद्य व्‍यवसायियों के लिए खाद्य सुरक्षा कानूनों का पालन करने और लाइसेंस एवं पंजीकरण, स्वच्छता रेटिंग तथा प्रशिक्षण को सुविधाजनक बनाने में मददगार साबित होगी। खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के अलावा यह योजना विशेषकर खाद्य एवं पोषण से जुड़ी पृष्‍ठभूमि वाले युवाओं के लिए नये रोजगार अवसर भी सृजित करेगी। खाद्य सुरक्षा मित्रों (एफएसएम) को एफएसएसएआई द्वारा प्रशिक्षण एवं प्रमाण-पत्र दिये जाएंगे, ताकि वे संबंधित कार्य कर सकें और अपनी सेवाओं के लिए खाद्य व्‍यवसायियों से भुगतान प्राप्‍त कर सकें। 15 एफएसएम के प्रथम बैच को आज प्रमाण-पत्र दिये जाएंगे (योजना का विवरण https://fssai.gov.in/mitra/ पर उपलब्‍ध है)।
‘ईट राइट जैकेट’ का आज शुभारंभ किया गया, जिसका उपयोग विभिन्‍न क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मियों (फील्‍ड स्‍टाफ) द्वारा किया जाएगा। यह स्‍मार्ट डिजाइन वाली जैकेट है, जिसमें अनेक तकनीकी उपकरण जैसे कि टैबलेट/स्‍मार्ट फोन, क्‍यूआर कोड और पहचान करने एवं नजर रखने के लिए आरएफआईडी टैग लगाये जा सकते हैं। इससे जहां एक ओर विभिन्‍न क्षेत्रों में काम कर रहे फील्‍ड स्‍टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर इससे खाद्य सुरक्षा व्‍यवस्‍था में पारदर्शिता, प्रोफेशनल रुख एवं पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी तथा इसके साथ ही स्‍वामित्‍व की भावना आएगी एवं एफएसओ को उन पर नजर रखने में सुविधा होगी। ‘ईट राइट झोला’ दरअसल कपड़े का एक ऐसा थैला है, जिसे फिर से उपयोग में लाया जा सकता है, अत: यह खुदरा किराना दुकानों में खरीदारी करते वक्‍त प्‍लास्टिक की थैलियों का स्‍थान बड़ी आसानी से ले सकेगा। चूंकि बार-बार उपयोग में लाने पर थैले बैक्‍टीरिया, सूक्ष्‍म जीवाणु इत्‍यादि की वजह से दूषित हो जाते हैं, अत: स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा एवं साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए कपड़े के थैलों की नियमित धुलाई आवश्‍यक है। कपड़े के ये थैले एक निजी वस्‍त्र किराया सेवा कंपनी के जरिये किराये पर उपलब्‍ध कराये जा रहे हैं।
देश भर में कार्यरत घरेलू कामगारों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने के उद्देश्‍य से एफएसएसएआई ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अधीनस्‍थ घरेलू कामगार क्षेत्र कौशल परिषद (डीडब्‍ल्‍यूएसएससी) के साथ साझेदारी की है। आरडब्‍ल्‍यूए के सहयोग से डीडब्‍ल्‍यूएसएससी के प्रशिक्षण साझेदारों के जरिये पहले चरण में एक लाख घरेलू कामगारों और घर-घर काम करने वाली महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह आंकड़ा आगे चलकर बढ़ाया जाएगा।
देश भर में ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान को व्‍यापक बनाने के लिए एफएसएसएआई ने अनेक हस्तियों को इससे जोड़ा है। इस्‍तेमाल में लाए जा चुके कुकिंग ऑयल को बायो डीजल में तब्‍दील करने और जिन्‍दगी के प्रथम 1000 दिनों में पोषण पर दो लघु फिल्‍में इस अवसर पर जारी की गईं, जिनमें क्रमश: श्री विराट कोहली और सुश्री जुही चावला ने भूमिका निभाई है।
***


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने तमिलनाडु के चेन्नई के मामल्लपुरम में दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता को भारत और चीन के बीच ‘सहयोग के एक नए दौर’ की शुरूआत कहा।

प्रधानमंत्री आज मामल्लपुरम में अनौपचारिक वार्ता के दूसरे दिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता की शुरूआत में अपना उद्घाटन वक्तव्य दे रहे थे।

पिछले साल वुहान में दोनों देशों के बीच पहले अनौपचारिक शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इससे हमारे संबंधों में स्थिरता बढ़ी है और उसे एक नई रफ्तार मिली है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सामरिक संचार में बढ़ोत्तरी हुई है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ‘हमने तय किया है कि हम अपने मतभेदों को विवादों में बदलने से पहले ही उसका समाधान करेंगे, हम एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशील होंगे और हमारे संबंध विश्व शांति एवं स्थिरता के लिए प्रयासरत होंगे।’

मामल्लपुरम में दूसरे अनौपचारिक शिखर वार्ता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘चेन्नई शिखर वार्ता में अब तक हमने द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर काफी बातचीत की है। वुहान शिखर वार्ता ने हमारे द्विपक्षीय संबंधों को एक नई गति प्रदान की है। आज हमारे चेन्नई कनेक्ट के साथ दोनों देशों के संबंधों में सहयोग के एक नए युग की शुरुआत हुई है।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग को हमारे दूसरे अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए भारत आने के लिए धन्यवाद देता हूं। चेन्नई कनेक्ट से भारत-चीन संबंधों को काफी गति मिलेगी। इससे दोनों देशों और दुनिया के लोगों को फायदा होगा।’


विद्युत और नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री श्री आर.के. सिंह ने आज गुजरात के नर्मदा जिले के टेंट सिटी में राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों के विद्युत तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन का उद्घाटन किया। दो दिन के इस सम्मेलन में राज्यों के ऊर्जा मंत्री तथा शीर्ष अधिकारी भाग ले रहे हैं। सौभाग्य योजना के अंतर्गत घरों के लगभग सार्वभौमिक विद्युतीकरण के लक्ष्य की प्राप्ति के बाद यह पहला सम्मेलन है। सौभाग्य योजना के अंतर्गत रिकॉर्ड 16-17 महीनों में 26.6 मिलियन घरों को विद्युतिकृत किया गया।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए केन्द्रीय विद्युत मंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी और कहा कि 500 से अधिक रजवाड़ों को भारत में विलय करने के लिए देश उनका ऋणी है। विद्युत क्षेत्र की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सभी के लिए 27×7 विद्युत आपूर्ति करने वाले टिकाऊ और कारगर विद्युत क्षेत्र के बिना विकसित देश नहीं बन सकता।

श्री सिंह ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भारतीय विद्युत क्षेत्र निवेश आकर्षित करें। यह तभी होगा, जब कारोबारी सुगमता हो और संविदा का उल्लंघन न हो। उन्होंने विद्युत उत्पादकों को बिजली वितरण कंपनियों द्वारा समय से भुगतान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

विद्युत मूल्यों को स्पर्धी और किफायती बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए विद्युत मंत्री ने कहा कि प्रणाली की खामियों का बोझ साधारण जन पर नहीं थोपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता संपन्न सेवा उपभोक्ताओं का अधिकार है।

विद्युत नुकसान में कमी तथा बिलिंग और संग्रह क्षमता के लिए विद्युत मंत्री ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर गरीबों के हित में है, क्योंकि इसमें एक ही समय पूरे महीने के बिल का भुगतान करने के लिए उपभोक्ता को बाध्य नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि इससे बिल भुगतान सुगमता होती है और बिजली की चोरी की संभावना कम होती है। उन्होंने सभी राज्यों से प्राथमिकता के आधार पर सभी सरकारी विभागों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का आग्रह किया।

श्री आर.के. सिंह ने जलवायु परिवर्तन की चर्चा करते हुए कहा कि यह वैश्विक चिंता का विषय है और भारत सभी संभव तरीके से जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान के लिए संकल्पबद्ध है। कुसुम योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना आने वाले वर्षों में इस योजना से सौर ऊर्जा से कृषि पम्प चलेंगे। इससे न केवल राज्यों का सब्सिडी बोझ कम होगा, बल्कि किसानों को भी लाभ होगा और किसान आवश्यकता से अधिक बिजली सरकार को बेचेंगे। इससे किसानों को भूजल के न्यायोचित उपयोग के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और बिजली की बचत होगी, क्योंकि किसान आवश्यकता से अधिक बिजली सरकार को बेचकर मुद्रा अर्जित करेंगे।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए विद्युत सचिव श्री सुभाष गर्ग ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और दो दिन के इस सम्मेलन में विचार किए जाने वाले विषयों पर प्रकाश डाला।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा सचिव श्री आनंद कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन भारत के लिए संकल्प का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत दिसंबर, 2022 से पहले 175 गीगा वॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के संयुक्त राष्ट्र संबोधन में 450 गीगा वॉट के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की घोषणा का भी उल्लेख किया।

दो दिन के इस सम्मेलन में सभी के लिए 24×7 विद्युत आपूर्ति, कारोबारी सुगमता, संविदा की पवित्रता, नियामक विषयों, पीएम-कुसुम, सृष्टि, डीडीयूजीजेवाई, आईपीडीएस योजनाओं के क्रियान्वयन, अल्ट्रामेगा नवीकरणीय ऊर्जा पार्कों की स्थापना, ट्रांसमिशन और ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर केन्द्रीय विद्युत मंत्री द्वारा राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों की 7वीं वार्षिक एकीकृत रेटिंग जारी की गई। 22 राज्यों की 41 वितरण कंपनियों की रेटिंग की गई है, जिसमें से सात कंपनियों को ए + की रेटिंग प्राप्त हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 22 वितरण कंपनियों का उन्नयन किया गया है।

***


भारत द्वारा अफ्रीका के साथ प्रगाढ़ संबंध को उच्च प्राथमिकता देने की घोषणा के साथ उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने आज कोमोरोस और सिएरा लियोन के दौरे की शुरूआत की।

श्री नायडू ने कहा कि भारत अफ्रीका को “फोकस महाद्वीप” मानता है और गत पांच वर्षो में भारत के राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने अफ्रीका महाद्वीप के 32 दौरे किए हैं। इसके साथ ही भारत ने अफ्रीका में 18 नए दूतावास खोलने का निर्णय भी लिया है।

कोमोरोस की राजधानी मोरोनी पहुंचने पर राष्ट्रपति श्री अज़ाली असौमानी श्री वैकेंया नायडू का गर्मजोशी से स्वागत किया उन्होंने सैन्य सलामी प्रदान की गई।

कोमारोस में अपने पहले कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने भारतीय प्रवासियो को संबोधित करते हुए उनसे नए भारत की विकास गाथा में शामिल होने का आव्हान किया। उन्होंने कोमारोस के भारतीयो की अपनी समृद्धि कोमारोस के निवासियो के साथ साझा करने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कोमारोस को ओर समृद्ध बनाने का आव्हान करते हुए कहा कि “आईए हम अधिक समृद्ध,समरसतापूर्ण और दीर्घकालिक विश्व बनाए”।

उपराष्ट्रपति ने कहा प्रवासी भारतीयो ने केवल 250 होने के बाद भी कोमारोस के सामाजिक और आर्थिक सहित विभिन्न क्षेत्रो में अहम योगदान दिया है।

उन्होंने प्रवासी भारतीयो की सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखने और शांतिप्रिय समुदाय की छवि बनाए रखने के लिए सराहना भी की।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक विकास और सामाजिक बदलाव के कार्यक्रमो के संबंध में जानकारी देते हुए श्री नायडू ने कहा कि विश्व भर में मंदी के बाद भी भारत विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में शामिल है और वर्ष 2024-25 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रीलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर तक पहुंचने की संभावना है।

अर्थव्यवस्था में सुधार करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमो की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि कार्पोरेट कर में भारी कमी से देश में निवेश बढेगा। आज भारत में व्यापार करना न सिर्फ निवेशको के लिए लाभदायक है बल्कि इसे सरल भी बनाया गया है। भारत ने महत्वपूर्ण कर सुधार की शुरूआत की है जिनमें एक देश-एक कर,एक देश-एक बाजार भावना वाला जीएसटी भी सम्मिलित है।

सरकार द्वारा आर्थिक सुधारो के बाद विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के संबंध में भारत दुनिया के सबसे खुली अर्थव्यवस्था बन गई है।स्टार्ट-अप इंडिया देश में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है और भारत के युवा डिजिटल क्रांति के वाहक हैं और स्टार्ट-अप को शक्ति दे रहे हैं।

अफ्रीका के साथ भारत के व्यापार का संदर्भ देते हुए श्री नायडू ने कहा कि अफ्रीकी देशो के साथ भारत का व्यापार गत वर्ष के मुकाबले 12 प्रतिशत बढ़ा है। आज 54 बिलियन डॉलर के कुल निवेश के साथ भारत अफ्रीका में निवेश करने वाला 5 सबसे बड़ा देश है।

श्री नायडू ने कहा कि वो राष्ट्रपति श्री अज़ाली असौमानी के साथ सफल बैठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भारत और कोमोरोस के बीच श्री वेंकैया नायडू और श्री अज़ाली असौमानी की मौजूदगी में कल कई समझौतो पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उनका स्मरण करते हुए कहा कि गांधी जी को भेदभाव और उपनिवेशवाद से संघर्ष की प्रेरणा अफ्रीका से मिली।

श्री नायडू ने कोमोरोस के प्रवासी भारतीयो को वर्ष 2021 में आयोजित होने वाले अगले प्रवासी भारतीय दिवस में भाग लेने का निमंत्रण दिया।

उपराष्ट्रपति श्री नायडू के साथ पशुपालन,डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री श्री संजीव कुमार बाल्यान,सासंद श्री रामविचार नेतराम और वरिष्ठ अधिकारियो का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इस दौरे में यात्रा कर रहा है।

***


अपने वायु सैनिकों के बीच खुद को पाकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में, मैं इस अवसर को अपने देश के सशस्त्र बलों को समर्पित करता हूं।
आर्मी एविएशन कोर के अस्तित्व के 32 वर्ष हो चुके हैं। यह सम्‍पूर्ण अवधि उनकी वीरता, सम्मान और गौरव की गाथाओं से परिपूर्ण रही है। 1986 में अपनी स्थापना के तुरंत बाद, आर्मी एविएशन कोर ने श्रीलंका में ‘ऑपरेशन पवन’ के दौरान युद्ध में अपनी स्वच्छ साख कायम की।
1984 के बाद से कोर के लिए सियाचिन ग्लेशियर अंतिम कार्यस्थल रहा है। बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में 20000 फुट और उससे अधिक ऊंचाई पर काम कर रहे, कोर के अत्यधिक कुशल और उत्‍प्रेरित पायलटों ने ‘ऑपरेशन मेघदूत’ में कठोर और बहुमूल्य कार्य किया है।
इस संदर्भ में, मैं पिछले वर्ष 10 मई को सियाचिन यात्रा के दौरान कुमार पोस्ट की अपनी यात्रा का विशेष रूप से उल्लेख करूंगा। यह एक अनोखा अनुभव था। ग्लेशियर में प्रतिकूल परिस्थितियों में रहने वाले हमारे अधिकांश जवान अद्वितीय पराक्रम और दृढ़ संकल्प का प्रमाण हैं। मैंने अपनी यात्रा के दौरान महसूस किया कि हम इन बहादुर सैनिकों की सतर्कता और बलिदान के कारण शांति से रहते हैं।
आर्मी एविएशन कोर ने विशिष्ट शौर्य और विशिष्ट सेवा के लिए 273 सम्मान और पुरस्कार हासिल किए हैं। इससे कोर के जवानों की असाधारण बहादुरी और जोश का पता चलता है और यह हमारी सशस्त्र सेनाओं के सभी सैनिकों और अधिकारियों के लिए एक आदर्श है। आपने विभिन्न युद्धों और ऑपरेशनों में प्रतिष्‍ठा हासिल की है और खेलों, जान जोखिम में डालने जैसी और अनेक पेशेवर चुनौतियों के दौरान आगे बढ़कर कार्य किया है।
आपके साहस और निष्‍ठा ने 1999 में ‘ऑपरेशन विजय’ में ‘कारगिल’ युद्ध जीता। आपके बहुत से स्‍क्‍वाड्रन्‍स को उनके असाधारण कार्यों के लिए प्रतिष्ठित ‘चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ यूनिट प्रशस्ति पत्र’ प्रदान किया गया। संयुक्त राष्ट्र शांति सेना मिशन में रहते हुए सोमालिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे देशों में कार्य करते समय आपने अपने देश के उत्कृष्ट राजदूतों की भूमिका निभाई है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपने उत्‍तम कार्य किया है।
कलर प्रदान करने के लिए आयोजित इस समारोह में, मैं आर्मी एविएशन कोर के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहता हूं। उनके खून और बलिदान ने हमारी प्रभुसत्‍ता की रक्षा की है और देश को गौरवान्वित किया है। मैं कोर के पूर्व और सेवारत सैनिकों को उनकी कर्तव्‍य निष्‍ठा और पेशेवर आचरण के लिए बधाई देना चाहता हूं। आर्मी एविएशन कोर के सदस्य दुनिया में सबसे कठिन क्षेत्रों और खराब मौसम में सच्ची ताकत बनकर उभरे हैं। मैं आर्मी एविशन कोर की समूची बिरादरी के सभी रेंकों और परिवारों को शुभकामना देने के लिए इस अवसर का लाभ उठाना चा‍हता हूं। भारतीय सेना और देश को उन पर गर्व है।
हम अपने देश की सीमाओं के साथ-साथ उसकी प्रभुसत्‍ता की रक्षा करने के लिए सत्‍यनिष्‍ठा की शपथ लेते हैं। मुझे विश्‍वास है कि हम इस संकल्‍प को पूरा करेंगे और अपने देश की प्रतिष्‍ठा को बरकरार रखेंगे चाहे इसकी कोई भी कीमत चुकानी पड़े और श्रेष्‍ठता के अपने सभी प्रयासों को जारी रखेंगे।
ईश्‍वर से प्रार्थना है कि आप ऊंची उड़ान भरें और राष्‍ट्र को कीर्ति दिलाएं। मैं आपकी ‘सुखद वापसी’ और ‘अच्‍छी रफ्तार’ की कामना करता हूं।
*****


निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) वाराणसी में 11-14 अक्‍टूबर, 2019 को 38वें इंडिया कार्पेट एक्सपो (वाराणसी में 15वां) का आयोजन करने जा रही है। यह एक्‍सपो संपूर्णानंद संस्‍कृत यूनिवर्सिटी ग्राउंड में सांस्‍कृतिक धरोहर और भारतीय हस्‍तनिर्मित कालीनों और फ्लोर कवरिंग की बुनाई के कौशलों को बढ़ावा देने के लक्ष्‍य के साथ विदेशों से आने वाले कालीन के खरीददारों के लिए आयोजित किया जा रहा है। इंडिया कार्पेट एक्‍सपो कालीन के अंतरराष्‍ट्रीय खरीददारों, क्रेता घरानों, क्रेता एजेंटों, आर्किटेक्‍ट्स और भारतीय कालीन विनिर्माताओं तथा निर्यातकों के लिए मुलाकात करने और कारोबारी संबंध स्‍थापित करने का मंच है। यह एक्‍सपो साल में दो बार वाराणसी और दिल्‍ली में आयोजित किया जाता है।

इंडिया कार्पेट एक्‍सपो एशिया में लगने वाले विशालतम हस्‍तनिर्मित कालीन मेलों में से एक है। कालीन खरीदने वालों की आवश्‍यकता के अनुसार किसी भी तरह के डिजाइन, रंग, गुणवत्‍ता और आकार को अपनाने की विलक्षण भारतीय क्षमता ने उसे अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में बेहद जाना-पहचाना नाम बना दिया है। यह उद्योग भारत के विभिन्‍न हिस्‍सों से ऊन, रेशम, मानव निर्मित फाइबर, जूट, कॉटेन और विभिन्‍न प्रकार के कपड़ों के विविध मिश्रणों का उपयोग करता है। कार्पेट उद्योग में निर्माण और निर्यात दोनों के लिए ही वृद्धि की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यह उद्योग पर्यावरण के अनुकूल है और यह दुलर्भ और नष्‍ट हो जाने वाले ऊर्ज के संसाधनों का इस्‍तेमाल नहीं करता।

देशभर में कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के 2700 सदस्‍य हैं और वाराणसी की विशाल कालीन निर्माता पट्टी पर इंडिया कार्पेट एक्‍सपो के आयोजन का प्रमुख उद्देश्‍य विदेशों के सभी कालीन खरीददारों को कारोबार का अवसर चुनने का अनूठा अवसर प्रदान करना है। परिषद कालीन आयातकों साथ ही साथ विनिर्माताओं और निर्यातकों के लिए विशिष्‍ट कारोबारी वातावरण उपलब्‍ध कराने का प्रयास करती है। देशभर के लगभग 200 सदस्‍य इस एक्‍सपो में भाग ले रहे हैं।

भारत में प्रमुख कालीन निर्माण केंद्र उत्‍तर प्रदेश, जम्‍मू-कश्‍मीर, राजस्‍थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, पूर्वोत्‍तर क्षेत्र, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना ,छत्‍तीसगढ़ और झारखंड में हैं।

वस्‍त्र मंत्रालय में सचिव श्री रवि कपूर 11 अक्‍टूबर, 2019 को 38वें इंडिया कार्पेट एक्‍सपो का उद्घाटन करेंगे और विकास आयुक्‍त, हस्‍तशिल्‍प, शांतनु सम्‍मानित अतिथि होंगे।

450 से ज्‍यादा प्रतिष्ठित विदेशी कालीन खरीददारों के इस एक्‍सपो में भाग लेने की संभावना है।

मूल्‍य और मात्रा की दृष्टि से भारतीय हस्‍तनिर्मित कालीन उद्योग का अंतरराष्‍ट्रीय हस्‍तनिर्मित कालीन बाजार में सबसे पहला स्‍थान है। भारत अपने कुल कालीन उत्‍पादन में से 85-90 प्रतिश्‍त का निर्यात कर देता है।

हस्‍तनिर्मित कालीनों और फ्लोर कवरिंग्‍स का निर्यात

वर्ष

कुल निर्यात मिलियन डॉलर में

कुल निर्यात करोड़ रुपये में

2013-14

1579.09

9557.24

2014-15

1819.69

11120.30

2015-16

1726.78

11299.73

2016-17

1773.98

11895.16

2017-18

1711.17

11028.05

2018-19

1765.96

12364.68

भारत दुनिया के 70 से अधिक देशों को अपने हस्तनिर्मित कालीनों का निर्यात कर रहा है। इनमें अमरीका, जर्मनी, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, इटली और ब्राजील प्रमुख हैं। हाल ही में चीन को निर्यात भी शुरू किया गया है।

अमरीका के बाद जर्मनी और अन्य यूरोपीय देश भारतीय उत्पादों के निर्यात के लिए पारंपरिक बाजार रहे हैं। यूरोपीय बाजार पूरी तरह से विकसित हो चुके हैं और उनमें ज्‍यादा वृद्धि की संभावना नहीं बची है। परिषद ने संयुक्त अमरीका, लैटिन अमेरिकी देशों – ब्राजील, चिली, अर्जेंटीना, चीन, स्कैंडिनेवियाई देशों – नॉर्वे, स्वीडन और दक्षिण अफ्रीका और ओशिआनिया देशों – ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की परिकल्‍पना ऐसे देशों के रूप में की है जिन पर बल दिया जा सकता है।

आयात को हतोत्‍साहित करने तथा घरेलू जरूरतों को पूरा करने की दृष्टि से कालीन और अन्‍य प्रकार की फ्लोर कवरिंग्‍स का निर्माण करने वाली इकाइयां लगाने के लिए निवेश की आपार संभावनाएं मौजूद हैं।

भारतीय हस्‍तनिर्मित कालीन उद्योग बड़े पैमाने पर श्रमिकों की आवश्‍यकता वाला उद्योग है और यह 20 लाख से ज्‍यादा कामगारों और कारीगरों विशेषकर महिलाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्‍यक्ष या परोक्ष रूप से रोजगार उपलब्‍ध कराता है। इस क्षेत्र में कार्यरत ज्‍यादातर कारीगर और बुनकर समाज के कमजोर वर्गों से संबंधित हैं और यह व्‍यापार उन्‍हें अपने घरों से ही अतिरिक्‍त और वैकल्पिक व्‍यवसाय करने का अवसर प्रदान करता है।

*****


WhatsApp Message!