नई दिल्‍ली, जेएनएन। संसद के चालू बजट सत्र के दौरान सोमवार को आधार कानून में संशोधन संबंधी विधेयक के साथ जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक लोक सभा में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध है। लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) जम्‍मू कश्‍मीर आरक्षण संबंधित अपना पहला बिल और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद आधार व अन्‍य कानून संशोधन बिल पेश करेंगे। दूसरी ओर तमिलनाडु में जल संकट को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सांसद टीआर बालू ने भी लोकसभा में नोटिस दिया है। वहीं इवीएम के विरोध में संसद परिसर में टीएमसी धरना प्रदर्शन कर रही है। टीएमसी की बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग है।

लाइव अपडेट्स

– ‘नो इवीएम, वी वांट पेपर बैलट’ लिखे पोस्‍टरों को हाथ में लिए संसद के बाहर महात्‍मा गांधी की मूर्ति के पास टीएमसी सांसदों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है।

– राष्‍ट्रीय जनता दल राज्‍य सभा सांसद मनोज झा ने कहा, ‘मुजफ्फरपुर में बच्‍चों की मौत पर मैंने राज्‍य सभा में ध्‍यानाकर्षन प्रस्‍ताव दिया है। जिसमें इस मुद्दे पर 24 जून को राज्यसभा में बहस करने की गुजारिश की गई है।’

–  राष्‍ट्रीय राजधानी में बढ़ते अपराध के मुद्दे को उठाते हुए आम आदमी पार्टी के राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने राज्‍य सभा में जीरो आवर नोटिस दिया है।

केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा पेश किए जाने वाले जम्‍मू कश्‍मीर आरक्षण संबंधित बिल के तहत जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन किया जाएगा। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को भी वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास रहने वाले लोगों की तरह ही आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।

क्‍या कहता है संशोधन-

आरक्षण नियम में हुआ संशोधन कहता है कि कोई व्यक्ति जो पिछड़े क्षेत्रों, नियंत्रण रेखा और अंतराष्ट्रीय सीमा से सुरक्षा कारणों से चला गया हो उसे आरक्षण के फायदों से वंचित नहीं किया जा सकता। पिछड़े इलाकों, एलओसी और आईबी के करीब रहने वाले इलाकों के निवासियों को कई सारी सुविधाएं मिलती हैं, जिसमें सरकारी नौकरियों में आरक्षण और पदोन्नित और सब्सिडी का फायदा मिलता है।

पिछड़े क्षेत्रों के निवासियों, नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के पास रहने वाले किसी भी व्यक्ति को शासकीय फायदा तभी मिल सकता है, जब वह पिछड़े क्षेत्र के रूप में चिह्नित जगहों पर 15 वर्षों से रह रहा हो।

कश्‍मीरी पंडितों को राहत

बता दें कि जम्मू कश्मीर सरकार ने पिछले महीने हजारों कश्मीरी पंडितों को बड़ी राहत देते हुए राज्य के लोगों के कई वर्गों को आरक्षण प्रमाणपत्र जारी किए जाने के नियमों में संशोधन की घोषणा की थी। इससे हजारों विस्थापित कश्मीर पंडितों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा था क्योंकि आतंकियों की धमकी की वजह से उन्होंने अपने घरों को छोड़ दिया था। सरकार की ओर से चिह्नित पिछड़े क्षेत्रों में रह रहे हजारों प्रवासी पंडितों को उस क्षेत्र में 15 वर्षों तक रहने की बाध्यता की वजह से आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा था।

राष्‍ट्रपति के अभिभाषण पर धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर चर्चा

संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में सबसे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन 2019 बिल पेश करेंगे। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है, जबकि जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति की ओर से लगाए गए अनुच्छेद 356 को जारी रखने के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तीन घंटे का समय रखा गया है।